यहीं कहीं…

Dedicated to Douglas Hofstadter, Marvin Minsky, Thomas Metzinger, Hugh Everett

[ये कविता हाइकूओं में लिखी गयी है- हाइकू कविता कहने का एक जापानी कायदा है. इसमें 3 पंक्तियां होती है, पंक्तियों में क्रमश: 5-7-5 अक्षर; अर्द्धाक्षरों को नहीं गिना जाता.]

मेरे साथ ही,
यहीं कहीं पास में,
मैं रहता हूं.

मुझसा कोई,
फड़फड़ा रहा है,
मेरी नसों में.

वो कहता है-
अतीत की आवाज़ें,
मेरी ही तो हैं!

मेरी अपनी,
नसों की गुफ़ाओं में,
मैं अटका हूं.

मेरे लिये भी,
मैं को ज़िंदा रखना,
मजबूरी है.

इन्ही नसों में,
इसी किसी समय,
हां, यहीं कहीं.